Pongal Festival Essay in Tamil & Hindi Font- पोंगल पर निबंध 2020

पोंगल पर निबंध 2020–  जैसा कि हम सभी लोग जानते है कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर धर्म के लोग रहते है, हर दिन कोई ना कोई त्योहार होता है, ऐसे हि एक पर्व है पोंगल | यह हर वर्ष जनबरी कि 15 तारीख को होता है और 3 दिनों तक चलता है, पोंगल तमिलनाडु का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है । हम आपको बता दे कि जो प्रसाद भगवान को भोग लगाया जाता है। उसे ही पोंगल कहा जाता है। पोंगल 200-300 ईस्वी पूर्व से मनाया जाता है। तमिलनाडु मे इस पर्व के दिन सभी सरकारी संस्थानों में अवकाश रहता है। आज कि इस पोस्ट मे हम आपको Pongal Festival Niband in Hindi, Pongal Par Niband, Pongal in Essay English आदि कि जानकारी देंगे जिन्हें आप whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|



Pongal Festival Essay in Hindi


भारत पर्वो की भूमि है, विभिन्न  राज्यों में विभिन्न पर्व विभिन्न प्रकार से मनाए जाते है। वही तमिलनाडु के लोग पोंगल बहुत उत्साह के साथ मनाते है। पोंगल का अर्थ होता है परिपूर्ण। इसी दिन लोगों के घर खुशियों और धन से भरे होते हैं। पोंगल किसानों का त्यौहार होता है। पोंगल त्यौहार को मुख्य रूप से दक्षिण भारत में मनाया जाता है। ये पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। यह चार दिन का पर्व उन देवताओं को समर्पित होता है जो कृषि से संबंधित होते हैं। इस त्यौहार का किसानों के लिए विशेष महत्त्व है । यह कृषि से जुड़ा हुआ त्यौहार है । तमिलनाडु में भरी सर्दियों में भी वारिश होती है । चावल यहाँ की मुख्य फसल है । चावल की फसल को अधिक वर्षा का पानी चाहिए । इन्द्रदेव वर्षा के देवता हैं इसलिए इन्द्रदेव की पूजा इस त्यौहार की प्रमुख विशेषता है ।

पोंगल तमिलनाडू का एक प्राचीन त्यौहार है। तमिलनाडु के लोग बड़ी बेसब्री से इस त्यौहार की प्रतीक्षा करते हैं, क्योंकि धान की फसल कटाई के लिए दिसम्बर के अन्त या जनवरी के मध्य तक तैयार हो जाती है । सीजन में लोगों को ग्रामीण तमिलनाडू में व्यस्त कर दिया जाता है। स्त्री , पुरुष और बच्चे सभी खेतों में फसल लगाने के लिए खेतों में आतेे है |


Pongal Essay in Tamil Langauge


नीचे हम आपको Pongal’ par Nibandh Tamil Font, Pongal Essay in Hindi & Tamil Font, पोंगल फेस्टिवल Speech, Pongal Festival Niband in Hindi, Pongal Par Niband, Pongal in Essay English, भारत के प्रमुख त्यौहार, पोंगल बनाने की विधि, पोंगल त्योहार कहाँ मनाया जाता है, पोंगल रेसिपी आदि की जानकारी दी है जिसे आप किसी भी भाषा जैसे Hindi, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language Font , 100 words, 150 words, 200 words, 400 words में साल  2019, 2020 का full collection whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|


ਭਾਰਤ ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਅਤੇ ਮੇਲਿਆਂ ਦੀ ਧਰਤੀ ਹੈ. ਭਾਰਤ ਦੇ ਹਰ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਵੱਖ ਵੱਖ ਕਿਸਮਾਂ ਦੇ ਤਿਉਹਾਰ ਮਨਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੇਕਰ ਕੇਰਲ ਦੇ ਲੋਕ ਓਨਮ ਨੂੰ ਮਨੋਰੰਜਨ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਨਾਲ ਮਨਾਉਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਦੇ ਲੋਕ ਵੀ ਉਸੇ ਜੋਸ਼ ਅਤੇ ਮਨੋਰੰਜਨ ਨਾਲ ਮਨਾਉਂਦੇ ਹਨ. ਅਸਲ ਵਿਚ ਪੋਂਗਲ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਵਿਚ ਸਭ ਤੋਂ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਤਿਉਹਾਰ ਹੈ

ਇਹ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਮਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਤਿੰਨ ਦਿਨ ਚਲਦਾ ਹੈ. ਇਸ ਤਿਉਹਾਰ ਦੀ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਮਹੱਤਤਾ ਹੈ। ਇਹ ਖੇਤੀ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਇੱਕ ਤਿਉਹਾਰ ਹੈ. ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਵਿੱਚ, ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਵੀ, ਇਹ ਸਲਾਹ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ. ਚੌਲ ਇੱਥੇ ਦੀ ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਹੈ. ਚੌਲਾਂ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਬਾਰਸ਼ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਧੇਰੇ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ. ਭਗਵਾਨ ਇੰਦਰ ਬਾਰਸ਼ ਦਾ ਦੇਵਤਾ ਹੈ, ਇਸ ਲਈ ਭਗਵਾਨ ਇੰਦਰ ਦੀ ਪੂਜਾ ਇਸ ਤਿਉਹਾਰ ਦੀ ਮੁੱਖ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾ ਹੈ.

ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਦੇ ਲੋਕ ਉਤਸੁਕਤਾ ਨਾਲ ਇਸ ਤਿਉਹਾਰ ਦੀ ਉਡੀਕ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ, ਕਿਉਂਕਿ ਚੌਲਾਂ ਦੀ ਫਸਲ ਦਸੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਜਾਂ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਅੱਧ ਤੱਕ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ. ਕਿਸਾਨ ਆਪਣੀ ਫਸਲ ਦੀ ਵਾingੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਛੁੱਟੀ ਦੇ ਮੂਡ ਵਿਚ ਹਨ। ਬਾਅਦ ਵਿਚ, ਕਿਸਾਨ ਪੂਰੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਅਤੇ ਜੋਸ਼ ਨਾਲ ਇਸ ਤਿਉਹਾਰ ਨੂੰ ਸੁਤੰਤਰ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮਨਾਉਂਦੇ ਹਨ. ਇਹ ਖੁਸ਼ੀ ਦਾ ਤਿਉਹਾਰ ਹੈ ਅਤੇ ਬੜੇ ਧੂਮਧਾਮ ਨਾਲ ਮਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਇਸ ਤਿਉਹਾਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਦਿਨ ਨੂੰ ਭੋਗੀ ਪੋਂਗਲ ਦੇ ਨਾਮ ਨਾਲ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ.
ਚੌਲ ਦਾ ਦਲੀਆ ਭੋਗੀ ਪੋਂਗਲ ਦੇ ਦਿਨ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਦੇ ਹਰ ਘਰ ਵਿੱਚ ਬਣਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਚਾਵਲ ਦੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਇਹ ਦਲੀਆ ਬਹੁਤ ਸਵਾਦ ਹੈ. ਲੋਕ ਦੋਸਤਾਂ ਅਤੇ ਰਿਸ਼ਤੇਦਾਰਾਂ ਨੂੰ ਦਾਵਤ ਲਈ ਬੁਲਾਉਂਦੇ ਹਨ. ਇਹ ਭੋਜਨ ਮੀਂਹ ਦੇ ਦੇਵਤਾ, ਇੰਦਰ ਦੇ ਸਨਮਾਨ ਵਿੱਚ ਆਯੋਜਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ.


पोंगल पर निबंध 2020



जैसा कि ओणम् केरलवासियों का एक महत्त्वपूर्ण पर्व है, उसी प्रकार पोंगल तमिलनाडु के लोगों का महत्त्वपूर्ण पर्व है । उत्तरभारत में जिन दिनों मकर सक्रान्ति का पर्व मनाया जाता है, उन्हीं दिनों दक्षिण भारत में पोंगल का त्यौहार मनाया जाता है।
भारत एक कृषि प्रधान देश है । यहाँ की अधिकांश जनता कृषि के द्वारा आजीविका अर्जित करती है । आजकल तो उद्योगिकरण के साथ-साथ कृषि कार्य भी मशीनों से किया जाने लगा है । परन्तु पहले कृषि मुख्यत: बैलों पर आधारित थी । बैल और गाय इसी कारण हमारी संस्कृति में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं ।

भगवान शिव का वाहन यदि बैल है तो भगवान श्रीकृष्ण गोपालक के नाम से जाने जाते हैं । गायों की हमारे देश में माता के समान पूज्य मानकर सेवा की जाती रही है । गाय केवल दूध ही नहीं देती बल्कि वो हमें बछड़े प्रदान करती है जो खेती करने के काम आते हैं । तमिलनाडुवासी तो पोंगल के अवसर पर विशेष रूप से गाय, बैलों की पूजा करते हैं ।
यह त्योहार प्रतिवर्ष मकर संक्रान्ति के आस-पास मनाया जाता है । यह उत्सव लगभग तीन दिन तक चलता है । लेकिन मुख्य पर्व पौषमास की प्रतिपदा को मनाया जाता है । अगहन मास में जब हरे-भरे खेत लहलहाते हैं तो कृषक स्त्रियाँ अपने खेतों में जाती हैं ।

भगवान से अच्छी फसल होने की प्रार्थना करती है । इन्हीं दिनों घरों की लिपाई-पुताई प्रारम्भ हो जाती है । अमावस्या के दिन सब लोग एक स्थान पर एकत्र होते हैं । इस अवसर पर लोग अपनी समस्याओं का समाधान खोजते हैं । अपनी रीति-नीतियों पर विचार करते हैं और जो अनुपयोगी रीति-नीतियाँ हैं उनका परित्याग करने की प्रतिज्ञा की जाती है ।
जिस प्रकार 31 दिसम्बर की रात को गत वर्ष को संघर्ष और बुराइयों का साल मानकर विदा किया जाता है, उसी प्रकार पोंगल को भी प्रतिपदा के दिन तमिलनाडुवासी बुरी रीतियों को छोड़ने की प्रतिज्ञा करते हैं ।

यह कार्य ‘पोही’ कहलाता है । जिसका अर्थ है- ‘जाने वाली’ । इसके द्वारा वे लोग बुरी चीजों का त्याग करते हैं और अच्छी चीजों को ग्रहण करने की प्रतिज्ञा करते हैं ।
पोही के अगले दिन अर्थात् प्रतिपदा को पोंगल की धूम मच जाती है । इस अवसर पर सभी छोटे-बड़े लोग काम में आने वाली नई चीजे खरीदते हैं और पुरानी चीजों को बदल डालते हैं । नए वस्त्र और नए बर्तन खरीदे जाते हैं ।

नए बर्तनों में दूध उबाला जाता है । खीर बनाई जाती है । लोग पकवानों को लेकर इकट्‌ठे होते हैं, और सूर्य भगवान की पूजा करते हैं । मकर सक्रान्ति से सूर्य उत्तरायण में चला जाता है दिन बड़े होने लगते हैं । सूर्य भगवान की कृपा होने पर ही फसलें पकती हैं । किसानों को उनकी वर्ष भर की मेहनत फल मिलता है ।

ये त्योहार तामिलनाडु का त्योहार अवश्य है पर इसके पीछे जो आध्यात्मिक संदेश छिपा है वह सम्पूर्ण भारतवासियों के लिए पवित्रता और नवोत्साह का संदेश देता है । इस त्योहार पर गाय के दूध के उफान को बहुत महत्व दिया जाता है ।

उनका विचार है कि जिस प्रकार दूध का उफान शुद्ध और शुभ है उसी प्रकार प्रत्येक प्राणी का मन भी शुद्ध संस्कारों से उज्ज्वल होना चाहिए । इसलिए वे अन्त:करण की शुद्धता के लिए सूर्यदेव से प्रार्थना करते हैं |


Pongal Niband in Hindi


पोंगल एक फसल का उत्सव होता है। जो जनवरी महीने के बीच मे आता है। यह तमिलनाडु के लोगो का प्रमुख त्योहार होता है। सीजन में ग्रामीण लोंगो खेती में व्यस्त होते  है। स्त्री, पुरूष ओर बच्चे सभी खेतो में फसल लगाने जाते है। जब खेत पूरे धान से भर जाता हैं तो ऐसा लगता है जैसे हरे समुद्र की लहरे लहलहा रही है और ये देखकर किसान का मन खुशी से भर जाता है और ऐसा दर्शय तमिलनाडु के लोगो के मन मे एक अलग ही छाप छोड़ जाता है। उसके बाद पोंगल के दिन लोग इस चावल की खीर बनाते है ओर बो भी आंगन में घर के अंदर नही। फिर इस खीर का भोग भगवान को लगया जाता है। इसे ही पोंगल कहा जाता है।

प्रथम दिन

पर्व के पहले दिन को भोगी पोंगल के नाम से जानते है। इस दिन तमिलनाडु के प्रत्येक घर मे चावल बनाये जाते है। लोग अपने मित्रों और सम्बन्धियो को आमंत्रित करते है। यह दावत इंद्र देवता के संम्मान में आयोजित की जाती है। लोग चावल को अनेक रूप में बनाते है। ऐसा लोग भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए करते है। ताकि वो अच्छी वर्षा करें।

दूसरा दिन

पर्व के दूसरे दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। इसे सूर्य पोंगल कहा जाता है। इस दिन सूर्य को धन्यवाद कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि अच्छी फसल उगाने में सूर्य देव का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए किसान लोग इस दिन भगवान सूर्य की पूजा अर्चना करते है। इस दिन चावल को पकाकर भोग लगाते है। महिलाएं सूर्य के प्रारूप बनाती है।

तीसरा दिन

तृतीय दिन मतु पोंगल के नाम से जाना जाता है। तमिलनाडु के किसान गाय की पूजा करते है । यह दिन गाय को समर्पित होता है। गाय को नेहलाया जाता है उसे अच्छे से नहलाकर उसके सिंग पर रंग किये जाते है। उन्हें अच्छी अच्छी भोजन खिलाई जाती है। रात को लोग अच्छा भोजन बनाते है और अपने मित्रो ,सम्बंधियो को आमंत्रित करते है।


You Also Like: 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2020 - OnlineHindiMaster Frontier Theme