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पारसी धर्म पर हिंदी निबंध- Essay On Parsi New Year in Hindi & English- Zoroastrianism Essay

Essay On Parsi New Year- इस्लाम धर्म, पारसी धर्म द्वारा संपन्न माना जाता है। ये दोनों एक जैसे से ही हैं। दोनों धर्मों में ही पैगम्बर को ईश्वर का दूत माना गया है। पारसी धर्म दुनिया के प्राचीनतम धर्मों में से एक है। इसे जोरोस्ट्रियनिस्म नाम से भी जाना जाता है। इस धर्म की स्थापना जराथूस्त्र या जोरोस्टर के द्वारा ईरान में छठी शताब्दी में हुई थी। ईरान में एक परसिया स्थान है जिसके आधार पर पारसी धर्म का नाम रखा गया। इसी को देखते हुए आज हम आपको बताएँगे, information about parsi religion in hindi, parsi navroz in marathi, parsi festival, parsi navroz festival information in marathi language, parsi navroz festival information in gujarati, These will provide information about Marathi, Hindi, English, Bengali, Gujarati, Tamil, Telugu, etc., which you can use in your school essay competition, program or speech competition. This essay has been given especially for class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 and college students. आदि जिन्हे आप फेसबुक, व्हाट्सप्प पर अपने दोस्त व परिवार के लोगो के साथ साझा कर सकते हैं |


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Essay On Parsi New Year in Hindi


जिस प्रकार प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी का दिन नव वर्ष के रुप में मनाया जाता हैं. ऐसे ही हर साल अगस्त के महीने की 17 तारीख को पारसी नव वर्ष मनाया जाता हैं. इस दिन को पारसी समुदाय के लोग तथा इण्डिया के लोग बड़े ही उत्साह से मनाते हैं.

ऐसा माना जाता कि 17 अगस्त के दिन ही तीन हजार वर्ष पहले इरान के जरथुस्त्र वंश के शासक शाह जमशेद ने सिंहासन ग्रहण किया था. शाह जमशेद ने ही पारसी कैलंडर का निर्माण किया था. जिसे “शहंशाही” के नाम से भी जाना जाता हैं. शहंशाही कैलंडर के अनुसार नये साल की शुरुआत मार्च महीने से होती हैं. इसलिए प्रत्येक वर्ष पारसी समुदाय के लोग इस दिन नव वर्ष मनाते हैं तथा अपने शासक शाह जमशेद को याद करते हैं.

पारसी समुदाय के अनुसार इस दिन पूरी कायनात का निर्माण हुआ था. इस लिए भी इस दिन को विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता हैं.

पारसी नव वर्ष मनाये जाने वाले अन्य स्थान – पारसी नव वर्ष मुख्य रूप से ईरान देश में मनाया जाता हैं. इसके अलावा यह दिन नव वर्ष के रूप में इराक, भारत, बरहीन, पाकिस्तान, लेबनान, ताजीकिस्तान आदि देशों में भी मनाया जाता हैं.

पारसी नव वर्ष कैसे मनाया जाता हैं (How to Celebrate Parsi New Year)
पारसी समुदाय का यह त्यौहार उनकी एकता का भी प्रतीक माना जाता हैं. इसलिए इस दिन पारसी लोग नव वर्ष मनाने के लिए अपने घर पर अपने रिश्तेदारों को, मित्रों को तथा आस – पडोस के लोगों को निमंत्रण देते हैं तथा उनके लिए खास तैयारियां करते हैं. अपने घर को फूलों से तथा अन्य वस्तुओं से सजाते हैं. घर के मुख्य द्वार के बीच विभिन्न रंग के रंगीन पाउडर से प्रकृति के मनमोहक चित्र बनांते हैं.

इस दिन घर को अंदर और बाहर से अच्छी तरह सजाने के बाद घर के सभी व्यक्ति नए कपडे पहन कर तैयार होते हैं और अपने महमानों का गुलाब जल छिडक कर स्वागत करते हैं.

इस दिन लोग अपने घर में एक मेज रखकर उस पर जरथुस्त्र की तस्वीर, फूल, फल, चीनी, धूप, अगरबत्ती, शीशा, मोमबत्ती आदि पवित्र वस्तुएं रखते हैं. पारसी परम्परा में यह मान्यता हैं कि इस दिन इन सभी वस्तुओं को मेज पर रखने से घर के सदस्यों की आयु में तथा घर के सुख – सौभाग्य में वृद्धि होती हैं.

पारसी समुदाय में इस दिन पुलाव, सेवई, मूंग दाल का हलवा आदि स्वादिष्ट भोजन बनाकर अपने मेहमानों को खिलाया जाता हैं.

मेहमानों को स्वादिष्ट भोजन कराने के बाद सभी लोग इकट्ठे होकर पूजा स्थलों पर जाते हैं और भगवान से प्राथना करते हैं. भगवान से प्रार्थना करने की यह विधि पारसी परम्परा के अनुसार “जश्न” कहलाती हैं. मंदिर में जाने के बाद व्यक्ति मनुष्य जीवन देने के लिए ईश्वर को धन्यवाद भी देते हैं तथा आने वाले साल को बेहतर बनाने के लिए अपने मन से सारे नकारात्मक विचारों को निकाल देते हैं और सकारात्मक सोच रखने की कोशिश करते हैं.

मंदिर से आने के बाद पारसी समुदाय के लोग गरीब लोगों को दान देते हैं. पारसी नव वर्ष में अग्नि देवता का भी विशेष महत्व हैं. इस दिन सभी लोग इकठे होकर आग जलाते हैं और उसमें चन्दन की लकड़ियों को डालकर अग्नि देवता का धन्वाद करते हैं तथा उनसे भी नव वर्ष को शुभ बनाने के लिए प्रार्थना करते हैं. अग्नि देवता से प्रार्थना करने के बाद सभी लोग एक दुसरे से मिलते हैं और उन्हें नव वर्ष की मुबारकबाद देते हैं.
पारसी नव वर्ष के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते है.


पारसी धर्म पर हिंदी निबंध


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एक दौर था जब पारसी समाज का एक बड़ा समुदाय हुआ करता था, लेकिन बदलाव के इस दौर ने हमसे हमारे दूर कर दिए। कई ने करियर और बेहतर पढ़ाई के कारण बड़े शहरों की ओर रुख किया, तो कुछ ऐसे भी हैं जो आज भी समाज को जीवित रखे हुए हैं। 19 अगस्त को पारसी समाज का नववर्ष मनाया जाता है। आइए जानते हैं पारसी धर्म और उससे जुड़े कुछ अनछुए पहलू।
वक्त ने जिंदगी के कई खट्टे-मीठे अनुभव कराए, लेकिन हमारे संस्कार ही हैं, जिसके दम पर आज भी अपने धर्म और इससे जु़ड़े रीति-रिवाजों को संभाले हुए हैं।

पारसी धर्म का इतिहास और परंपरा :-
1380 ईस्वी पूर्व जब ईरान में धर्म परिवर्तन की लहर चली तो कई पारसियों ने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया, लेकिन जिन्हें यह मंजूर नहीं था वे देश छोड़कर भारत आ गए। यहां आकर उन्होंने अपने धर्म के संस्कारों को आज तक सहेजे रखा है। सबसे खास बात ये कि समाज के लोग धर्म परिवर्तन के खिलाफ होते हैं।

श्री बजान ने बताया कि पारसी समाज की लड़की किसी दूसरे धर्म में शादी कर लें तो उसे धर्म में रखा जा सकता है, लेकिन उनके पति और बच्चों को धर्म में शामिल नहीं किया जाता। ठीक इसी तरह लड़कों के साथ भी होता है। लड़का किसी दूसरे समुदाय में शादी करता है तो उसे और उसके बच्चों को धर्म से जुड़ने की छूट है, लेकिन उनकी पत्नी को नहीं।

* समाज का कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे शहर या देश से यहां आता है तो उसके रहने और खाने की व्यवस्था पूर्ण आस्था और सेवाभाव से करते हैं।
* समाज के लोगों को एक सूत्र में पिरोए रखने के लिए कभी गलत राह नहीं पकड़ी। आज भी पारसी समाज बंधु अपने धर्म के प्रति पूर्ण आस्था रखते हैं। नववर्ष और अन्य पर्वों के अवसर पर लोग पारसी धर्मशाला में आकर पूजन करते हैं।
* पारसी समुदाय धर्म परिवर्तन पर विश्वास नहीं रखते।

* यह सही है कि शहरों और गांवों में इस समाज के कम लोग ही रह गए हैं। खासकर युवा वर्ग ने करियर और पढ़ाई के सिलसिले में शहर छोड़कर बड़े शहरों की ओर रुख कर लिया है, लेकिन हां, कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो अपने पैरेंट्स की केयर करने आज भी शहर में रह रहे हैं।
बजान के अनुसार हमारे भगवान प्रौफेट जरस्थ्रु का जन्म दिवस 24 अगस्त को मनाया जाता है। नववर्ष पर खास कार्यक्रम नहीं हो पाते इस वजह से 24 अगस्त को पूजन और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं। यह दिन भी हमारे पर्वों में सबसे खास होता है। उनके नाम के कारण ही हमें जरस्थ्रुटी कहा जाता है।

पारसियों के लिए यह दिन सबसे बड़ा होता है। इस अवसर पर समाज के सभी लोग पारसी धर्मशाला में इकट्ठा होकर पूजन करते हैं। समाज में वैसे तो कई खास मौके होते हैं, जब सब आपस में मिलकर पूजन करने के साथ खुशियां भी बांटते हैं, लेकिन मुख्यतः तीन मौके साल में सबसे खास हैं। एक खौरदाद साल, प्रौफेट जरस्थ्रु का जन्मदिवस और तीसरा 31 मार्च। ईराक से कुछ सालों पहले आए अनुयायी 31 मार्च को भी नववर्ष मनाते हैं।

नववर्ष पारसी समुदाय में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। धर्म में इसे खौरदाद साल के नाम से जाना जाता है। पारसियों में एक वर्ष 360 दिन का और शेष पांच दिन गाथा के लिए होते हैं। गाथा यानी अपने पूर्वजों को याद करने का दिन। साल खत्म होने के ठीक पांच दिन पहले से इसे मनाया जाता है।


 Zoroastrianism Essay in English


Parsi New Year is also touted as the Navroz Mubarak day which is celebrated as the Iranian or Persian New Year. This is a kind of festival which is being celebrated by worldwide with much rejoice.

Navroz or Parsi New Year is celebrated by people who are the residents of the countries including, Iran, Afghanistan, Azerbaijan, Georgia, India, Iraq, Kazakhstan, Kyrgyzstan, Pakistan, Russia, Syria, Tajikistan, Turkey, Turkmenistan, and Uzbekistan. As the name says, Parsi New Year celebration is done by Parsi people as per the Persian Calendar.

Parsi New Year is one of the biggest celebrations for Parsi and it is also known as Navroz Mubarak or Jamshed Navroz. It is named after Jamshed, who was king of Persia, and the celebration Navroz also marked as an important celebration for the Parsi community.

As per the Holy Writ, King Jamshed was the crucial person who had brought Parsi Calendar into light. On the day of Navroz Mubarak, the Parsi community firstly cleans their houses properly then they decorate the same with variety kind of stuff. They wear new clothes and prepare delicious cuisine.

They invite guests to come in their house and they exchange wishes and sweets and gifts with each other. In some landmark places, fireworks also set off in the sky which is the sign to welcome the New Year.

Parsi New Year is also called as Novroz, which is mainly celebrated in Iran. Even though different countries name the Navroz Mubarak in a different way but the still style of the celebrations is same mostly in the countries.

As we all know that normal New Year, the celebration is done by the Gregorian calendar, this Parsi New Year is celebrated as per the Persian Calendar. As per the Persian Calendar, the Parsi New Year 2019 this year comes in 17st march.


Short Essay on Parsi New Year in Hindi


पारसी न्यू इयर को नवराज़ मुबारक दिवस के रूप में भी जाना जाता है जिसे ईरानी या फारसी नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह एक तरह का त्योहार है जिसे दुनिया भर में बहुत खुशी के साथ मनाया जा रहा है।

नवराज़ या पारसी नया साल उन लोगों द्वारा मनाया जाता है जो ईरान, अफगानिस्तान, अज़रबैजान, जॉर्जिया, भारत, इराक, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, सीरिया, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान समेत देशों के निवासी हैं। जैसा कि नाम कहता है, फारसी कैलेंडर के अनुसार पारसी लोगों द्वारा पारसी नव वर्ष का जश्न मनाया जाता है।

पारसी न्यू इयर पारसी के लिए सबसे बड़े उत्सवों में से एक है और इसे नवराज़ मुबारक या जमशेद नवोज़ के नाम से भी जाना जाता है। इसका नाम जमशेद के नाम पर रखा गया है, जो फारस के राजा थे, और उत्सव नवराज़ को पारसी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उत्सव के रूप में भी चिह्नित किया गया।

पवित्र लेख के अनुसार, राजा जमशेद महत्वपूर्ण व्यक्ति थे जिन्होंने पारसी कैलेंडर को प्रकाश में लाया था। नवराज़ मुबारक के दिन, पारसी समुदाय पहले अपने घरों को ठीक से साफ करता है, फिर वे विभिन्न प्रकार की चीजों के साथ सजाते हैं। वे नए कपड़े पहनते हैं और स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करते हैं।

वे मेहमानों को अपने घर आने के लिए आमंत्रित करते हैं और वे एक-दूसरे के साथ इच्छाओं और मिठाई और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं। कुछ ऐतिहासिक स्थानों में, आकाश में आतिशबाजी भी बंद हो जाती है जो नए साल का स्वागत करने का संकेत है।

पारसी न्यू इयर को नोवोज़ भी कहा जाता है, जिसे मुख्य रूप से ईरान में मनाया जाता है। भले ही अलग-अलग देश नवराज़ मुबारक को अलग तरीके से नाम दें लेकिन समारोहों की शैली अभी भी देशों में समान है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सामान्य नव वर्ष, उत्सव ग्रेगोरियन कैलेंडर द्वारा किया जाता है, यह पारसी न्यू इयर फारसी कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। फारसी कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष पारसी नया साल 2019 17 मार्च में आता है।


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Miraj Khan

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