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वर्ल्ड पॉपुलेशन डे पोएम 2019- World Population Day Poem in Hindi For School Childrens

वर्ल्ड पॉपुलेशन डे पोएम- 11 जुलाई को सालाना पूरे विश्व में विश्व जनसंख्या दिवस के रुप में एक महान कार्यक्रम मनाया जाता है। पूरे विश्व में जनसंख्या मुद्दे की ओर लोगों की जागरुकता को बढ़ाने के लिये इसे मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद के द्वारा वर्ष 1989 में इसकी पहली बार शुरुआत हुई। लोगों के हितों के कारण इसको आगे बढ़ाया गया था जब वैश्विक जनसंख्या 11 जुलाई 1987 में लगभग 5 अरब (बिलीयन) के आसपास हो गयी थी। आज की इस पोस्ट में आपको, world population day poem in hindi, best poem on world population day, world population day short poem, जिनको आप फेसबुक व व्हाट्सप्प के जरिये किसी के साथ भी शेयर कर सकते है |



World Population Day Poem in Hindi


जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
खाद्द्यान्न संकट खड़ा हो गया
उर्जा संकट बड़ा हो गया

भुखमरी चारो ओर बढ़ी
गरीबी की समस्या सामने खड़ी
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही

बेरोजगारी हताशा ला रही
आर्थिक संकट की चिंता खाए जा रही
महंगाई तेजी से बढ़ रही
आम लोगो का जीना मुश्किल कर रही

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा
जनता को न्याय नहीं मिल रहा
जंगल काटे जाते है
पेड़ न कोई लगाते है

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
चारो ओर प्रदुषण बढ़ते जा रहा
नई नई बीमारिया फैला रहा
खतरे में है वन्यजीवों का जीवन
हो रहे रोज उनपर नए नए सितम

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
हमें इन समस्यायों से निजात पाना होगा
जनसंख्या के बढ़ने पे अंकुश लगाना होगा
हमें कुछ तो कदम उठाना होगा |


वर्ल्ड पॉपुलेशन डे पोएम


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जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
खाद्द्यान्न संकट खड़ा हो गया
उर्जा संकट बढ़ा हो गया
भुखमरी चारो ओर बढ़ी

गरीबी की समस्या सामने खड़ी
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
बेरोजगारी हताशा ला रही
आर्थिक संकट की चिंता खाय जा रही

महंगाई तेजी से बढ़ रही
आम लोगो का जीना मुश्किल कर रही
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही

भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा
जनता को न्याय नहीं मिल रहा
जंगल काटे जाते है
पेड़ न कोई लगाते है
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही

बहुत से समस्याए पैदा कर रही
चारो ओर प्रदुषण बढ़ते जा रहा
नई नई बीमारिया फैला रहा
खतरे में है वन्यजीवों का जीवन

हो रहे रोज उनपर नए नए सितम
जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही

हमें इन समस्यायों से निजात पाना होगा
जनसंख्या के बढ़ने पे अंकुश लगाना होगा
हमें कुछ तो कदम उठाना होगा
छोटा परिवार , सुखी परिवार का नारा लगाना होगा |


Poem On World Population Day in Hindi


कौन कहता है
दुनिया की जनसंख्या सात अरब है
मुझे तो लगती यह सात सौ अरब है।

हर आदमी के होते हैं
कई चेहरे, कई रूप
छाँव के रंग बदल जाते हैं
जब आती है कड़ी धूप।

एक संत के चेहरे में
छिपा रहता है शैतान
त्यागी जिसे कहता है जग
आसमां छूता है उसका गुमान।

बिजली से कड़कते हैं
जो बन शब्दों के जाल
हकीकत में खामोश कर देता है उन्हें
किसी का डर तो किसी का माल।

जिसके चेहरे पर मुस्कुराहट, सौम्यता
और विनम्रता का निर्झर बहता है
उसके हाथों में कहीं छिपा
एक खूनी खंजर रहता है।

सच के साथ खड़े होकर
करते हैं जो संपादक झूठ का पर्दाफाश
उनकी नजरों से सुरक्षित है एक औरत
नहीं कर सकते इसका भी विश्वास।

मंदिर में जाकर
चन्दन का जिसने टीका लगाया होगा
नहीं जान सकता कोई
उसके मन में कितना मैल समाया होगा।

सत्य, अहिंसा, मुक्ति पर
जो देता है हर रोज गुरु ज्ञान
कितने अपराधों में होगा संलग्न
नहीं लगा सकते इसका भी अनुमान।

समाज सेवा की आड़ में
सेक्स स्कैंडल जैसे घृणित कार्यों को अंजाम
अहिंसा का मुखौटा लगाकर भी
होता है यहाँ कत्ले आम।

छद्म नारीवादियों के रूप में
जन्मे हैं नारी के नए शोषक
लिखते हैं जो प्रेम शास्त्र
उनमें से कई मिलेंगे नफरत के पोषक।

कायरों ने ओढ़ी शेरों की खाल
सन्यासी हो रहे मालामाल हैं
सच्चा आदमी पहचानना है मुश्किल
हर ओर मकड़ी के जाल हैं।

चिंता जनसंख्या से ज्यादा मुझे
एक आदमी में छिपे सौ चेहरों की है
किसी मासूम को अपना निशाना बनाये
खौफ़नाक पहरो की है।

देर-सबेर बढ़ती जनसंख्या पर
लगाम लग भी जायेगी
पर मुखौटे बदलने की यह प्रवृत्ति
तो दिनों-दिन बढ़ती ही जायेगी।

जनसँख्या नियंत्रण के साथ ही हो नियंत्रण
एक जन में छिपे दुर्जन इरादों पर भी
प्यार की झूठी कसमों पर
और नेता के झूठे वादों पर भी।

क्योंकि समस्याएं मात्रात्मक से ज्यादा
अब गुणात्मक हो रही है
दिखते हैं यहाँ शरीर ही शरीर
आत्माएं सबकी कहीं खो रही है |


Short Poem On World Population Day in Marathi


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कोण म्हणतो
जागतिक लोकसंख्या सात अब्ज आहे
मला वाटते की हे सातशे अब्ज आहे.

प्रत्येक माणसाकडे आहे
अनेक चेहरे, अनेक रूपे
सावलीचा रंग बदलतो
जेव्हा कठोर सूर्यप्रकाश येतो तेव्हा

संत च्या चेहऱ्यावर
भूत लपविला आहे
त्यागी जग म्हणतो
असहम त्याच्या अभिमानाचा स्पर्श करतो

लाइटनिंग वाढते
जे शब्द शब्द बनला
शांतपणे त्यांना शांत करते
कोणीतरी एखाद्याच्या वस्तू भय

कोणाचा चेहरा, सौम्यता वर मुस्करा
आणि नम्रता च्या humdrum वाहते
कुठेतरी त्याच्या हाती लपवत
एक रक्तरंजित डगर राहते.

सत्य सह उभे
संपादक झोपणे कोण
तिच्या डोळ्यांशी एक स्त्री सुरक्षित आहे
यावर विश्वास ठेवू शकत नाही.

मंदिरात जात आहे
सँडलवूड
काहीही माहित नाही
त्याच्या मनात किती अभाव असेल.

सत्य, अहिंसा, स्वातंत्र्य
कोण प्रत्येक दिवस मास्टर ज्ञान देते
किती गुन्हे दाखल होतील
तो अंदाज देखील करू शकत नाही.

सामाजिक सेवेच्या आज्ञेखाली
सेक्स स्कॅंडलसारख्या घृणास्पद कृती करा
अहिंसा महाक करून
कत्तल येथे सामान्य आहे

छद्म नारीवादी म्हणून
नवीन जन्मलेल्या मादा suckers
प्रेम विज्ञान कोण लिहितो
त्यातील बरेच लोक द्वेषभावनांचा तिरस्कार करतील

भयानक शेर त्वचा
भिक्षु श्रीमंत आहेत
खरे माणूस ओळखणे कठीण आहे
सर्व बाजूंनी मकळे आहेत.

लोकसंख्येपेक्षा मला जास्त काळजी घ्या
एका माणसाने शंभर चेहरे लपविले आहेत
स्वत: चे निष्पाप लक्ष्य बनवा
हे एक डरावनी चाल आहे.

उदयोन्मुख लोकसंख्या
Halter देखील दिसेल
मास्क बदलण्याची प्रवृत्ती
त्यामुळे दिवस आणि रात्र वाढेल.

लोकसंख्या नियंत्रण सह नियंत्रण
एक व्यक्ती देखील वाईट विचारांवर
प्रेमाच्या खोटी शपथांवर
आणि नेत्याच्या खोट्या आश्वासनांवर

कारण समस्या प्रमाणात जास्त आहेत
आता गुणात्मक आहे
शरीर येथे शरीर पहा
आत्मा सर्वकाही गमावत आहेत.


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Miraj Khan

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