हिंदी निबंध

जगन्नाथ रथ यात्रा पर निबंध 2019- Short Paragraph On Rath Yatra in Hindi

जगन्नाथ रथ यात्रा पर निबंध- रथ यात्रा का पर्व भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है, यह भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से भी एक है और यहां भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और उनकी बहन देवी सुभद्रा की पूजा की जाती है। यहाँ यह त्यौहार सबसे साहित्यिक है और 10-11 सदियों से लोग इसे मानते चले आ रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी मौजूद है ब्रह्म पुराण में, पद्म पुराण में, स्कन्दा पुराण में तथा कपिला समिथा में। हर साल रथ यात्रा अषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष द्वितीय के दिन मनाया जाता है। इसी को देखते हुआ आज हम आपको जगन्नाथ की रथ यात्रा पर, Rath Yatra story in Hindi, Jagannath rath Yatra Short Paragraph in hindi, Jagannath rath yatra Essya in Hindi, Rath yatra full Information, Jagannath ratha yatra Bhashan, रथ यात्रा की कहानी इन हिंदी, बताएँगे |


Onlinehindimaster.com


Paragraph On Jagannath Rath Yatra in Hindi


रथ यात्रा का त्योहार मनाने की शुरुआत जगन्नाथ पुरी से ही हुई थी, इसके बाद यह त्योहार पूरे भारत व अन्य देशो में भी मनाया जाने लगा, जगन्नाथ रथ यात्रा आरंभ होने की शुरुआत में पुराने राजाओं के वशंज पारंपरिक ढंग से सोने के हत्थे वाले झाड़ू से भगवान जगन्नाथ के रथ के सामने झाड़ु लगाते हैं और इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ रथयात्रा शुरु होती है। रथ यात्रा के शुरु होने के साथ ही कई सारे पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाये जाते हैं और इसकी ध्वनि के बीच सैकड़ो लोग मोटे-मोटे रस्सों से रथ को खींचते है। इसमें सबसे आगे बलभद्र यानी बलराम जी का रथ होता है।

इसके थोड़ी देर बाद सुभद्रा जी का रथ चलना शुरु होता है। सबसे अंत में लोग जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक खींचते है। रथ यात्रा को लेकर मान्यता है कि इस दिन रथ को खींचने में सहयोग से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।यही कारण इस दिन भक्त भगवान बलभद्र, सुभद्रा जी और भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के लिए ललायित रहते हैं। जगन्नाथ जी की यह रथ यात्रा गुंदेचा मंदिर पहुंचकर पूरी होती है। यह वही स्थान है जहा विश्वकर्मा जी ने तीनों देव प्रतिमाओं का निर्माण किया था।

पुरी में रथयात्रा का उत्सव भारत में भव्य हैं. तीर्थयात्रियों के हजारों इस पवित्र स्थान पर एकत्र कर लें. वे देश के विभिन्न भागों से आते हैं. इस मौकों पर पुरी में सभा की दुनिया में भारत में सबसे बड़ा या शायद है, यह उत्सव भगवान् जगन्नाथ के राम्मान में मनाया जाता है । जगन्नाथ को विष्णु के दस अवतारों में से एक अवतार माना जाता है |


Jagannath Puri Rath Yatra Essay in Hindi

 


Related image


यहाँ हम आपको पेश कर रहे है, Ratha yatra story in hindi, rath yatra story in bengali , rath yatra story in oriya, story behind car festival, rath yatra ki story, Rath Yatra story in Hindi, Jagannath rath Yatra Short Paragraph in hindi, Jagannath rath yatra Essya in Hindi, Rath yatra full Information, Jagannath ratha yatra Bhashan, इनको आप सोशल मीडिया के जरिये किसी के साथ भी शेयर कर सकते है |

भारत भर में मनाए जाने वाले महोत्सवों में जगन्नाथपुरी की रथयात्रा सबसे महत्वपूर्ण है। यह परंपरागत रथयात्रा न सिर्फ हिन्दुस्तान, बल्कि विदेशी श्रद्धालुओं के भी आकर्षण का केंद्र है। श्रीकृष्ण के अवतार जगन्नाथ की रथयात्रा का पुण्य सौ यज्ञों के बराबर माना गया है।

पुरी का जगन्नाथ मंदिर भक्तों की आस्था केंद्र है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। जो अपनी बेहतरीन नक्काशी व भव्यता लिए प्रसिद्ध है। यहां रथोत्सव के वक्त इसकी छटा निराली होती है, जहां प्रभु जगन्नाथ को अपनी जन्मभूमि, बहन सुभद्रा को मायके का मोह यहां खींच लाता है। रथयात्रा के दौरान भक्तों को सीधे प्रतिमाओं तक पहुंचने का मौका भी मिलता है।

यह दस दिवसीय महोत्सव होता है। इस दस दिवसीय महोत्सव की तैयारी का श्रीगणेश अक्षय तृतीया को श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा के रथों के निर्माण से होता है और कुछ धार्मिक अनुष्ठान भी महीने भर किए जाते हैं।

जगन्नाथजी का रथ ‘गरुड़ध्वज’ या ‘कपिलध्वज’ कहलाता है। 16 पहियों वाला रथ 13.5 मीटर ऊंचा होता है जिसमें लाल व पीले रंग के कप़ड़े का इस्तेमाल होता है। विष्णु का वाहक गरुड़ इसकी हिफाजत करता है। रथ पर जो ध्वज है, उसे ‘त्रैलोक्यमोहिनी’ कहते हैं। बलराम का रथ ‘तलध्वज’ के बतौर पहचाना जाता है, जो 13.2 मीटर ऊंचा 14 पहियों का होता है। यह लाल, हरे रंग के कपड़े व लकड़ी के 763 टुकड़ों से बना होता है। रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं।

रथ के ध्वज को उनानी कहते हैं। त्रिब्रा, घोरा, दीर्घशर्मा व स्वर्णनावा इसके अश्व हैं। जिस रस्से से रथ खींचा जाता है, वह बासुकी कहलाता है।’पद्मध्वज’ यानी सुभद्रा का रथ। 12.9 मीटर ऊंचे 12 पहिए के इस रथ में लाल, काले कपड़े के साथ लकड़ी के 593 टुकड़ों का इस्तेमाल होता है। रथ की रक्षक जयदुर्गा व सारथी अर्जुन होते हैं। रथध्वज नदंबिक कहलाता है। रोचिक, मोचिक, जिता व अपराजिता इसके अश्व होते हैं। इसे खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुडा कहते हैं।


Short Essay On Rath Yatra in English


This festival of Rath Yatra is quite ancient and it has been long been celebrated throughout India. It has always been a symbol of reverence for the people, here is the reason that on this day a large number of pilgrims come from far and wide to take the chariot of Lord Jagannath to Puri in Orissa.

Due to the lack of resources at the time of the past, even the far-reaching devotees could not reach this holy festival of Rath Yatra. But currently technological advances have made its appearance as grand. But due to this, many accidents are also seen, because now it is easy to reach Puri due to the means of travel.

A large number of devotees started coming to this festival and many devotees are injured and crushed during the chariot movement during the Rath Yatra. Many times, even after the stampede situation, many people die. Such things work to create naughtiness in this holy festival. Therefore, in this festival of Rath Yatra, security arrangements need to be done even better so that in the coming future, this person has given the message of reverence in this way.


जगन्नाथ रथ यात्रा पर निबंध


Related image


पूरे भारत भर में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को रथ यात्रा का यह पर्व काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। इसकी उत्पत्ति कैसे और कब हुई इसके विषय में कोई विशेष जानकारी नही प्राप्त है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि यह भारत के सबसे प्राचीनतम पर्वों में से एक है।

आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पूरे देश भर में रथ यात्रा के पर्व का आयोजन किया जाता है और इस दौरान विभिन्न स्थलों पर मेले और नाटकों का भी आयोजन होता है। इनमें से पुरी, हुगली जैसे स्थानों पर होने वाली रथ यात्राओं में भारी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते है।

पुरी में रथ यात्रा के इस पर्व का इतिहास काफी प्राचीन है और इसकी शुरुआत गंगा राजवंश द्वारा सन् 1150 इस्वी में की गई थी। यह वह पर्व था, जो पूरे भारत भर में पुरी की रथयात्रा के नाम से काफी प्रसिद्ध हुआ। इसके साथ ही पाश्चात्य जगत में यह पहला भारतीय पर्व था, जिसके विषय में विदेशी लोगो को जानकारी प्राप्त हुई। इस त्योहार के विषय में मार्को पोलो जैसे प्रसिद्ध यात्रियों ने भी अपने वृत्तांतों में वर्णन किया है।

सभी हिंदुओं की कार की बैठक के लिए तय दिन के लिए तत्पर हैं. हजारों लोगों ने गाड़ी से गुजरता है जो साथ सड़क के दोनों ओर इकट्ठा होते हैं. सभी दर्शकों देवता के दर्शन होने का अवसर पाने के लिए प्रयास करें. वे कार के पास मिल (रथ) और इसे खींचने के लिए कठिन संघर्ष.

पिता अपने बच्चों को खिलौने खरीदने के लिए बाजार के लिए है ले लो. मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों को घरेलू उपयोग के लिए लेख खरीदते हैं. दुकान रखवाले, छोटे व्यापारियों और हॉकरों एक बहुत अच्छा समय है. वे इस मौकों पर बहुत सारा पैसा कमाते हैं. फूल पौधों और फलों के पेड़ के ग्राफ्ट इस त्योहारों की एक बड़ी बिक्री है |


You Also Like: 

About the author

Avatar

Miraj Khan

Hello Friends My Name is Miraj Khan and My Blog Onlinehindimaster.com. I Share My Real Experiences Knowledge in Hindi on This Blog. I Write Some Category on This Blog. Adsense, Blogging, WordPress, Internet, Health And Festivals.

Leave a Comment