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Happy Mother Day Emotional Poem 2019| मातृ दिवस पर हिंदी कविता।

Happy Mother Day Emotional Poem 2019| मातृ दिवस पर हिंदी कविता- हैल्लो फ्रेंड्स जैसा की हम सब लोग जानते है, की मदर डे आने वाला है, यह दिन सभी माँ की लिए बहुत ख़ास दिन होता है, इस दिन पर सभी बच्चे अपनी माँ के लिए एक प्यारा सा सरप्राइज गिफ्ट करते है, So फ्रेंड्स इसी को देखते हुए आज मैं आपको मातृ दिवस पर Emotional Poem [कविता] बताने जा रहा हूँ, उम्मीद करता हूँ की आपको यह जरूर अच्छी लगेगी,

अगर देखा जाए तो इस साल 2019 में मातृ दिवस 12 मई को मनाया जाएगा, अगर आप भी अपने माँ के लिए कोई प्यारी सी कविता देख रहे है, तो आप बिलकुल सही जगह आये है, अगर आपको हमारे इस लेख में कोई भी कविता पसंद आती है, और आप उसको अपनी माँ के साथ शेयर करना चाहते है, तो वह बहुत आसानी से Copy करके शेयर कर सकते है।



फ्रेंड्स आज के इस लेख में आपको- Happy Mother Day Poem, मातृ दिवस दिवस कविता, Mother Day Short Poem, Happy Mother Day Beautiful Poem in Hindi, Mother Day Emotional Poem 2019, मदर डे हिंदी कविता, मातृ दिवस पर हिंदी कविता, Most Popular Poems on Mother Day, Happy Mother Day Small Poem, 2019 मातृ दिवस पर बेहतरीन कविता, मिलेंगी। So I Hope की आपको यह जरूर पसंद आएँगी।


Mother Day Emotional Poem 2019 in Hindi Font

हाँ माँ याद तुम्हारी आई, कंठ रूँधा आँखें भर आई
फिर स्मृति के घेरों में तुम मुझे बुलाने आई
मैं अबोध बालक-सा सिसका सुधि बदरी बरसाई
बालेपन की कथा कहानी पुनः स्मरण आई

त्याग तपस्या तिरस्कार सब सहन किया माँ तुमने
कर्म पथिक बन कर माँ तुमने अपनी लाज निभाई
तुमसे ही तो मिला है जो कुछ उसको बाँट रहा हूँ
तुम उदार मन की माता थीं तुमसे जीवन की निधि पाई

नहीं सिखाया कभी किसी को दुख पहुँचाना
नहीं सिखाया लोभ कि जिसका अन्त बड़ा दुखदाई
स्वच्छ सरल जीवन की माँ तुमसे ही मिली है शिक्षा
नहीं चाहिए जग के कंचन ‘औ झूठी पृभुताई

मुझे तेरा आशीष चाहिए और नहीं कुछ माँगू
सदा दुखी मन को बहला कर हर लूँ पीर पराई
यदि मैं ऐसा कर पाऊँ तो जीवन सफल बनाऊँ
तेरे चरणो में नत हो माँ तेरी ही महिमा गाई…!


जितना मैं पढता था, शायद उतना ही वो भी पढ़ती,
मेरी किताबों को वो मुझसे ज्यादा सहज कर रखती थी,

मेरी कलम, मेरी पढने की मेज़, उसपर रखी किताबे,
मुझसे ज्यादा उसे नाम याद रहते, संभालती थी किताबे,

मेरी नोट-बुक पर लिखे हर शब्द, वो सदा ध्यान से देखती,
चाहे उसकी समझ से परे रहे हो, लेकिन मेरी लेखनी देखती थी,

अगर पढ़ते पढ़ते मेरी आँख लग जाती, तो वो जागती रहती,
और जब मैं रात भर जागता, तब भी वो ही तो जागती रहती,

और मेरी परीक्षा के दिन, मुझसे ज्यादा उसे भयभीत करते थे,
मेरे परीक्षा के नियत दिन रहरह कर, उसे ही भ्रमित करते थे,

वो रात रात भर, मुझे आकर चाय काफी और बिस्कुट की दावत,
वो करती रहती सब तैयारी, बिना थके बिना रुके, बिन अदावात,

अगर गलती से कभी ज्यादा देर तक मैं सोने की कोशिश करता,
वो आकर मुझे जगा देती प्यार से, और मैं फिर से पढना शुरू करता,


***********

मेरे परीक्षा परिणाम को, वो मुझसे ज्यादा खोजती रहती अखबार में,
और मेरे कभी असफल होने को छुपा लेती, अपने प्यार दुलार में,

जितना जितना मैं आगे बढ़ता रहा, शायद उतना वो भी बढती रही,
मेरी सफलता मेरी कमियाबी, उसके ख्वाबों में भी रंग भरती रही,

पर उसे सिर्फ एक ही चाह रही, सिर्फ एक चाह, मेरे ऊँचे मुकाम की,
मेरी कमाई का लालच नहीं था उसके मन में, चिंता रही मेरे काम की,

वो खुदा से बढ़कर थी पर मैं ही समझता रहा उसे नाखुदा की तरह जैसे,
वो मेरी माँ थी, जो मुझे जमीं से आसमान तक ले गयी, ना जाने कैसे…!


माँ हमारी सदानीरा नदी जैसी
महक है वह
फूल वन की
सघन मीठी छाँव जैसी
घने कोहरे में
सुनहरी रोशनी के
ठाँव जैसी
नेह का अमरित पिलाती
माँ हमारी है गंभीरा नदी जैसी

सुबह मिलती
धूप बन कर
शाम कोमल छाँव हो कर
रात भर
रहती अकेली
वह अंधेरों के तटों पर
और रहती सदा हँसती
माँ हमारी महाधीरा नदी जैसी

एक मंदिर
ढाई आखर का
उसी की आरती वह
रोज़ नहला
नेहजल से
हम सभी को तारती वह
हर तरफ़ विस्तार उसका
माँ हमारी सिंधुतीरा नदी जैसी…!


Heart Touching Poem on Mother Day Hindi Font


माँ आँखों से ओझल होती,
आँखें ढूँढ़ा करती रोती।
वो आँखों में स्‍वप्‍न सँजोती,
हर दम नींद में जगती सोती।

वो मेरी आँखों की ज्‍योति‍,
मैं उसकी आँखों का मोती।
कि‍तने आँचल रोज भि‍गोती,
वो फि‍र भी ना धीरज खोती।

कहता घर मैं हूँ इकलौती,
दादी की मैं पहली पोती।
माँ की गोदी स्‍वर्ग मनौती,
क्‍या होता जो माँ ना होती।

नहीं जरा भी हुई कटौती,
गंगा बन कर भरी कठौती।
बड़ी हुई मैं हँसती रोती,
आँख दि‍खाती जो हद खोती।

शब्‍द नहीं माँ कैसी होती,
माँ तो बस माँ जैसी होती।
आज हूँ जो, वो कभी न होती,
मेरे संग जो माँ ना होती..!!


अंधियारी रातों में मुझको
थपकी देकर कभी सुलाती
Kabhi प्यार से मुझे चूमती
कभी डाँटकर पास बुलाती

कभी आँख के आँसू मेरे
आँचल से पोंछा करती वो
सपनों के झूलों में अक्सर
धीरे-धीरे मुझे झुलाती

सब दुनिया से रूठ रपटकर
जब मैं बेमन से सो जाता
हौले से वो चादर खींचे
अपने सीने मुझे लगाती…!


बचपन में अच्छी लगे यौवन में नादान
आती याद उम्र ढ़ले क्या थी माँ कल्यान

करना माँ को खुश अगर कहते लोग तमाम
रौशन अपने काम से करो पिता का नाम

विद्या पाई आपने बने महा विद्वान
माता पहली गुरु है सबकी ही कल्यान

कैसे बचपन कट गया बिन चिंता कल्यान
पर्दे पीछे माँ रही बन मेरा भगवान

माता देती सपन है बच्चों को कल्यान
उनको करता पूर्ण जो बनता वही महान

बच्चे से पूछो जरा सबसे अच्छा कौन
उंगली उठे उधर जिधर माँ बैठी हो मौन

माँ कर देती माफ़ है कितने करो गुनाह
अपने बच्चों के लिए उसका प्रेम अथाह…!



Mother Day Poem on Child in Hindi


जब कभी शाम के साये मंडराते हैं
मैं दिवाकिरण की आहट को रोक लेती हूँ
और सायास एक बार
उस तुलसी को पूजती हूँ,

जिसे रोपा था मेरी माँ ने
नैनीताल जाने से पहले
जब हम इसी आँगन में लौटे थे
तब मैं उस माँ की याद में रो भी न सकी थी,

Wah माँ जिसके सुमधुर गान फिर कभी सुन न सकी थी
वह माँ जो उसी आँगन में बैठ कर मुझे अल्पना उकेरना सिखा न सकी थी
Wah माँ जिसके बनाये व्यंजनों में मेरा भाग केवल नमकीन था।

वह माँ जिसके वस्त्रों में सहेजा गया ममत्व
मेरी विरासत न बन
एक परंपरा बन गया था
वह माँ जिसके पुनर्वास के लिए
हमने सहेजे थे कंदील और
हम बैठे थे टिमटिमाते दीपों की छाया में
और बैठे ही रहे थे।


Mother Day Sad Poem in Hindi


प्यारी प्यारी मेरी माँ
सारे जग से न्यारी माँ,

लोरी रोज सुनाती है
थपकी दे सुलाती है,

जब उतरे आगन में धुप
प्यार से मुझे जगाती है,

देती चीजे सारी माँ,
प्यारी प्यारी मेरी माँ,

ऊँगली पकड़ चलाती है,
सुबह-शाम घुमाती है,

ममता भरे हुए हातो से,
खाना रोज खिलाती है,

देवी जैसी मेरी माँ,
सारी जग से न्यारी माँ,

प्यारी प्यारी मरी माँ
प्यारी प्यारी मेरी माँ।


हैप्पी मदर डे Beautiful कविता


निर्भिक होकर उड़ चल अपनी डगर को
अम्बर सा आँचल लिये, तुम्हारी “माँ” है,

रँज-ओ-ग़म के बादल भी काफ़ूर हो जायेंगे
आशियाने में पास तुम्हारे, तुम्हारी “माँ” है,

किसकी तलाश में भटक रहा है मदार-मदार
काशी क्या, हरम क्या, बस तुम्हारी “माँ” है,

ममता की गहराई से हार गया समन्दर भी
देख तेरी मुस्कान, जी रही तुम्हारी “माँ” है,

तेरे कदमों की आहट से बढ़ जायेगी धड़कनें,
जाने कब से इंताजर में बैठी तुम्हारी “माँ” है,

कवियों की करतूतों से, भ्रमित न हो तू
मु-अत्तर गुल्सिताँ सिर्फ़ तुम्हारी “माँ” है,

उपमाओं से ना बदल शख़्सियत ऐ ‘कवि’
उसे “माँ” ही रहने दे, वो तुम्हारी “माँ” है।


मेरी ही यादों में खोई
अक्सर तुम पागल होती हो
माँ तुम गंगा-जल होती हो,

जीवन भर दुःख के पहाड़ पर
तुम पीती आँसू के सागर
फिर भी महकाती फूलों-सा
मन का सूना संवत्सर,

जब-जब हम लय गति से भटकें
तब-तब तुम मादल होती हो,

व्रत, उत्सव, मेले की गणना
कभी न तुम भूला करती हो
सम्बन्धों की डोर पकड कर
आजीवन झूला करती हो

तुम कार्तिक की धुली चाँदनी से
ज्यादा निर्मल होती हो,

पल-पल जगती-सी आँखों में
मेरी ख़ातिर स्वप्न सजाती
अपनी उमर हमें देने को
मंदिर में घंटियाँ बजाती

जब-जब ये आँखें धुंधलाती
तब-तब तुम काजल होती हो,

हम तो नहीं भगीरथ जैसे
कैसे सिर से कर्ज उतारें
तुम तो ख़ुद ही गंगाजल हो
तुमको हम किस जल से तारें

तुझ पर फूल चढ़ाएँ कैसे
तुम तो स्वयं कमल होती हो।


जन्म दात्री
ममता की पवित्र मूर्ति
रक्त कणो से अभिसिंचित कर
नव पुष्प खिलाती
स्नेह निर्झर झरता
माँ की मृदु लोरी से
हर पल अंक से चिपटाए
उर्जा भरती प्राणो में
विकसित होती पंखुडिया
ममता की छावो में
सब कुछ न्यौछावर
उस ममता की वेदी पर
जिसके
आँचल की साया में
हर सुख का सागर।


माँ पर रुला देने वाली कविता


बचपन में माँ कहती थी
बिल्ली रास्ता काटे,
तो बुरा होता है
रुक जाना चाहिए…

बचपन में माँ कहती थी
बिल्ली रास्ता काटे,
तो बुरा होता है
रुक जाना चाहिए…

मैं आज भी रुक जाता हूँ
कोई बात है जो डरा
देती है मुझे…

यकीन मानो,
मैं पुराने ख्याल वाला नहीं हूँ…
मैं शगुन-अपशगुन को भी नहीं मानता…

मै माँ को मानता हूँ
मैं माँ को मानता हूँ

दही खाने की आदत मेरी
गयी नहीं आज तक…
दही खाने की आदत मेरी
गयी नहीं आज तक..

माँ कहती थी,

घर से दही खाकर निकलो
तो शुभ होता है,
मैं आज भी हर सुबह दही
खाकर निकलता हूँ,
मैं शगुन-अपशगुन को भी नही मानता,

मै माँ को मानता हूँ
मैं माँ को मानता हूँ

आज भी मैं अँधेरा देखकर डर जाता हूँ,
भूत-प्रेत के किस्से खोफा पैदा करते हैं मुझमें,
जादू, टोने, टोटके पर मैं यकीन कर लेता हूँ|

बचपन में माँ कहती थी,
कुछ होते हैं बुरी नज़र लगाने वाले,
कुछ होते हैं खुशियों में सताने वाले,
यकीन मानों, मैं पुराने ख्याल वाला नहीं हूँ,
मै शगुन-अपशगुन को भी नहीं मानता,

मैं माँ को मानता हूँ
मैं माँ को मानता हूँ

मैंने भगवान को भी नहीं देखा जमीं पर
मैंने अल्लाह को भी नहीं देखा
लोग कहते है,
नास्तिक हूँ मैं
मैं किसी भगवान को नहीं मानता।

लेकिन माँ को मानता हूँ
में माँ को मानता हूँ…!


Heart Touching Poem in Hindi


चिंतन दर्शन जीवन सर्जन
रूह नज़र पर छाई अम्मा
सारे घर का शोर शराबा
सूनापन तनहाई अम्मा

उसने खुद़ को खोकर मुझमें
एक नया आकार लिया है,
धरती अंबर आग हवा जल
जैसी ही सच्चाई अम्मा

सारे रिश्ते- जेठ दुपहरी
गर्म हवा आतिश अंगारे
झरना दरिया झील समंदर
भीनी-सी पुरवाई अम्मा


घर में झीने रिश्ते मैंने
लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती थी
जाने कब तुरपाई अम्मा

बाबू जी गुज़रे, आपस में-
सब चीज़ें तक़सीम हुई तब-
मैं घर में सबसे छोटा था
मेरे हिस्से आई अम्मा।


Short Poem on Mother Day


मेरी प्यारी माँ तू कितनी प्यारी है
जग है अंधियारा तू उजियारी है,

शहद से मीठी हैं तेरी बातें
आशीष तेरा जैसे हो बरसातें

डांट तेरी है मिर्ची से तीखी
तुझ बिन ज़िंदगी है कुछ फीकी

तेरी आंखो में छलकते प्यार के आंसू
अब मैं तुझसे मिलने को भी तरसूं

माँ होती है भोरी भारी
सबसे सुन्दर प्यारी प्यारी।


क्या सीरत क्या सूरत थी
माँ ममता की मूरत थी

पाँव छुए और काम बने
अम्मा एक महूरत थी

बस्ती भर के दुख सुख में
एक अहम ज़रूरत थी

सच कहते हैं माँ हमको
तेरी बहुत ज़रूरत थी


Very Heart Touching Poem in Hindi


मैं अपने छोटे मुख कैसे करूँ तेरा गुणगान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान,

माता कौशल्या के घर में जन्म राम ने पाया
ठुमक-ठुमक आँगन में चलकर सबका हृदय जुड़ाया
पुत्र प्रेम में थे निमग्न कौशल्या माँ के प्राण
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

दे मातृत्व देवकी को यसुदा की गोद सुहाई
ले लकुटी वन-वन भटके गोचारण कियो कन्हाई
सारे ब्रजमंडल में गूँजी थी वंशी की तान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

तेरी समता में तू ही है मिले न उपमा कोई
तू न कभी निज सुत से रूठी मृदुता अमित समोई
लाड़-प्यार से सदा सिखाया तूने सच्चा ज्ञान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

कभी न विचलित हुई रही सेवा में भूखी प्यासी
समझ पुत्र को रुग्ण मनौती मानी रही उपासी
प्रेमामृत नित पिला पिलाकर किया सतत कल्याण
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

‘विकल’ न होने दिया पुत्र को कभी न हिम्मत हारी
सदय अदालत है सुत हित में सुख-दुख में महतारी
काँटों पर चलकर भी तूने दिया अभय का दान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान


Very Sad Poem in Hindi


मेरे सर्वस्व की पहचान
अपने आँचल की दे छाँव
ममता की वो लोरी गाती
मेरे सपनों को सहलाती
गाती रहती, मुस्कराती जो
वो है मेरी माँ।

प्यार समेटे सीने में जो
सागर सारा अश्कों में जो
हर आहट पर मुड़ आती जो
वो है मेरी माँ।

दुख मेरे को समेट जाती
सुख की खुशबू बिखेर जाती
ममता की रस बरसाती जो
वो है मेरी माँ।


तो फ्रेंड्स यह थी हमारी कुछ Happy Mother Day Emotional Poem 2019| मातृ दिवस पर हिंदी कविता। उम्मीद करता हूँ की आपको यह जरूर पसंद आयी होंगी, So फ्रेंड्स अगर अच्छी लगी हो तो अपनी माँ के साथ शेयर करे, और सोशल मीडिया पर भी शेयर करे जिससे की और लोग अपने माँ के साथ इन Emotional Poem को भी शेयर कर। सके

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Miraj Khan

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