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Holi ka Tyohar Kyu Manaya Jata hai? History of Holi?



हैल्लो फ्रेंड्स कैसे हो आप हम आपका स्वागत करते अपनी वेबसाइट पर पिछली पोस्ट में हमने आपको बताया था की नया साल क्यों कैसे और कब मनाया जाता है।

दोस्तों आज हम आपको अपनी वेबसाइट पर बहुत ही अच्छी जानकारी देने जा रहे है। और उसका नाम है होली क्यों मनाई जाती है  जिसको आप फॉलो करके अच्छी तरह से जान सकते है की होली क्यों और कैसे मनाई जाती है।

दोस्तों यह तो आपको पता ही होगा की हमारे देश भारत में लगभग हर धर्म में हर तरीके के त्यौहार हर्सोउल्लाह के साथ मनाये जाते है। बैसे ही होली भी एक ऐसा त्यौहार है जो बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है।

इस त्यौहार को हर धर्म के लोग चाहे वह बड़े हो या फिर बच्चे हो सभी आपस में मिलकर मनाते है। दोस्तों कहा जाता है की यह त्यौहार सिर्फ 2 देशों में मनाया जाता है। जिसमे से एक तो अपना भारत है और दूसरा नेपाल है।


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होली कब मनाई जाती है

होली का त्यौहार जो रंगो के नाम से ज्यादा जाना जाता है। दोस्तों यह त्यौहार वसंत ऋतू में  मनाया जाता है मतलब फान्गुन मास की पूर्णिमा को। इसी के कारण इस त्यौहार को फान्गुनी भी कहते है।

2019 होली की तारीक

दोस्तों इस बार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार 20 मार्च 2019 को होली का त्यौहार मनाया जायेगा,

होली क्यों मनाई जाती है

दोस्तों बहुत पहले की बात है किसी बक्त एक राजा हुआ करता था। उस राजा का नाम हिरण्यकस्यप था। हिरण्यकस्यप एक बहुत ही दुस्ट और क्रोधी राजा था। इसका एक छोटा भाई भी था जिसकी मृत्यु भगवन विष्णु के हाथो हो गई थी।

इसी के कारण वह दुस्ट राजा हिरण्यकस्यप अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहता था। लेकिन उसके पास इतनी ज्यादा सकती नहीं थी की वह भगवन विष्णु का वध कर सके।

इसलिए उसने ज्यादा शक्ति पाने के लिए घोर तपस्या की। और वह उस तपस्या में सफल हो गया। इसी कारन वह अपने आप को ईसबर समझने लगा और वह लोगों से अपनी पूजा करने लगा।

दोस्तों कहा जाता है की हिरण्यकस्यप का एक बेटा भी था जो भगवन विष्णु का सेवक था। उसका नाम प्रहलाद था। इसी कारन दुष्ट राजा हिरण्यकस्यप अपने बेटे से भगवन विष्णु की भक्ति को छोड़ने के लिए कहता था।

लेकिन प्रहलाद ने अपने पिता हिरण्यकस्यप की बात ना मानी और वह भगवन विष्णु का ही भक्त बनकर रहने लगा। इसी के करण हिरण्यकस्यप ने अपने बेटे प्रहलाद को मारने का निश्चय किया। और उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को नस्ट करने का काम दिया।

कहा जाता है की होलिका के पास एक ऐसी शक्ति थी जिससे वह आग में नहीं जल सकती थी। और उसने अपनी बहन होलिका से कहा की तुम प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आगा में बैठ जाओ।

और वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई उसने अपने सर पर एक शाल मतलब चुनरी ओढली लेकिन भगवन विष्णु ने बहुत ही तेज हवा चलाई और शाल उड़गई इसी के कारन भगवन विष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा की और होलिका का दहन किया।

उसी बक्त हिरण्यकस्यप को भी भगवन विष्णु ने नष्ट कर दिया। और तभी से सभी लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत की खुसी में होली का त्यौहार मनाना शुरू कर दिया।

होली का त्यौहार कैसे मनायें

दोस्तों जैसे जैसे होली के दिन करीब आने लगते है बैसे ही हमारे हिन्दू भाई होली की अच्छे से तैयारी करने लगते है। अपने घरों को सजाते है और घरों पर पुताई भी करवाते है।

जिससे घर और भी अच्छा चमकने लगे। और जब होली का त्यौहार आता है तो अच्छी अच्छी मिठाई और भी तरह के पकवान बनाते है और सब मिलकर कहते है। मार्कीटो में से अच्छे अच्छे कलर लाते है और एक दूसरे पर डालते है।

तो फ्रेंड्स यह था हमारा आज का आर्टिकल की के बारे में कुछ भी पूंछना या फिर कुछ भी बताना हो तो कमेंट कर कर अपनी राय दे सकते है।  दोस्तों मै उम्मीद करता हूँ की आज की हमारी पोस्ट आपको जरूर पसंद आयी होगी और अगर पसंद आयी हो तो शेयर भी कर दें।

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Miraj Khan
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