लाल बहादुर शास्त्री की कविताएं 2020- Lal Bahadur Shastri Ji Par Kavita in Hindi- शास्त्री जी पर कविताएं

लाल बहादुर शास्त्री भारत के महत्वपूर्ण नेताओं मे से एक थे। जिन्होंने देश के स्वाधीनता के लिए लड़ाई लड़ी और औरो को भी इस संघर्ष में साथ आने के लिए प्रेरित किया। लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को वाराणसी के समीप मुगलसराय में हुआ था। लगभग 20 वर्ष के ही आयु में वह स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हो गये थे और देशसेवा का प्रण लेते हुए यहीं से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत कर दी। शास्त्री जी बहुत ही सीधे और सरल सुभाव के थे जिन्होंने अपना सारा जीवन गरीब लोगों की सेवा में न्यौछावर कर दिया | शास्त्री जी की मृत्यु 11 जनवरी 1966 को दिल का दौरा पड़ने से हुई थी |

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Lal Bahadur Shastri Poem in Hindi


2 अक्टूबर को जन्म लिया था,
नाम लाल बहादुर शास्त्री था,
कद में भले ही छोटे थे वो,
पर गुणों में बहुत महान थे,
सादा जीवन उच्च विचार,
यही उनकी पहचान थे,
गाँधीवादी विचारधारा के ,
वो सच्चे अनुगामी थे,
आजादी की लड़ाई के
वो सक्रीय योगदानी थे,
अपने श्रेष्ठ कर्मो के कारण,
वो भारत की शान थे,
उनकी देशभक्ति और कर्मनिष्ठा,
पर पूरे देश को अभिमान है,
जन्मदिन के शुभ अवसर,
उनको कोटि कोटि प्रणाम है।।


लाल बहादुर शास्त्री की कविताएं


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पैदा हुआ उसी दिन,
जिस दिन बापू ने था जन्म लिया
भारत-पाक युद्ध में जिसने
तोड़ दिया दुनिया का भ्रम।

एक रहा है भारत सब दिन,
सदा रहेगा एक।
युगों-युगों से रहे हैं इसमें
भाषा-भाव अनेक।

आस्था और विश्वास अनेकों
होते हैं मानव के।
लेकिन मानवता मानव की
रही सदा ही नेक।
कद से छोटा था लेकिन था
कर्म से बड़ा महान।
हो सकता है कौन, गुनो वह
संस्कृति की संतान।


लाल बहादुर शास्त्री के लिए कविता


लाल बहादुर शास्त्री की कविताएं इसके साथ-साथ आप महात्मा गांधी पर कविता हिंदी में  पा सकते है |

एक थे लाल और एक थे बापू ,
कहाँ हैं अब ऐसे लाल और बापू ,
दोनों ने जीवन ,सर्वस्व किया ,नौछावर ,
अपनी इस जननी की खातिर ,
आओ मिलकर दिया जलाएं ,
जन्मदिन उनका मनाएँ ,
सुख ,समृधि का जो देखा उन्होंने सपना ,
उसको पूरा करने का क्योँ न ले प्रण अपना |
प्यारे बापू प्यारे शास्त्री जी ,
धन्यभाग हमारे ,
जो हम इस धरती पर आए ,
जहां ऐसे कर्णधार हमने हैं पाये |
अपने कर्मठ अमर सपूतों को ,
उनके पसीने की एक एक बूंदों को
क्योँ न याद करे हम दोनों को ,
भावबिह्वलहोकर दोनों को
इस धरा के अमर सपूतों को ,
एक ने बोला जय जवान -जय किसान ,
दूसरे बोले रघुपति राघव राजा राम
दोनों की थी एक ही बोली ,
देश हमारा खेले होली(रंगों की),
क्योँ न बोलें हम ये आज ,
भारत ,बन जाए हम सबकी शान


Short Poem On Shastri Ji in Hindi


लालों में वह लाल बहादुर,
भारत माता का वह प्यारा।
कष्ट अनेकों सहकर जिसने,
निज जीवन का रूप संवारा।

तपा तपा श्रम की ज्वाला में,
उस साधक ने अपना जीवन।
बना लिया सच्चे अर्थों में,
निर्मल तथा कांतिमय कुंदन।

सच्चरित्र औ’ त्याग-मूर्ति था,
नहीं चाहता था आडम्बर।
निर्धनता उसने देखी थी,
दया दिखाता था निर्धन पर।

नहीं युद्ध से घबराता था,
विश्व-शांति का वह दीवाना।
इसी शांति की बलवेदी पर,
उसे ज्ञात था मर-मिट जाना।


लाल बहादुर शास्त्री जयंती कविता


धोती वाले बाबा की
यह ऐसी एक लडा़ई थी
न गोले बरसाये उसने
न बन्दूक चलायी थी
सत्य अहि़सा के बल पर ही
दुश्मन को धूल चटाई थी
मन की ताकत से ही उसने
रोका हर तूफान को

हम श्रद्धा से याद करेगें
गाँधी के बलिदान को

ली सच की लाठी उसने
तन पर भक्ति का चोला
सबक अहि़सा का सिखलाया
वाणी में अमृत उसने घोला
बापू के इस रंग में रंग कर
देश का बच्चा- बच्चा बोला
कर देगें भारत माँ पर अर्पण
हम अपनी जान को

हम श्रद्घा से याद करेगें
गाँधी के बलिदान को

चरखे के ताने बाने से उसने
भारत का इतिहास रचा
हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई
सबमें इक विश्वास रचा
सहम गया विदेशी फिरंगी
लड़ने का अभ्यास रचा
मान गया अंग्रेजी शासक
बापू की पहचान को

हम श्रद्धा से याद करेगें
गाँधी के बलिदान को

जिस बापू ने सारे जग में
हिन्दुस्तान का नाम किया
उस पर ही इक घात लगाकर
अनहोनी ने काम किया
बापू ने बस राम कहा और
चिर निद्र में विश्राम किया
यह संसार नमन करता है
आजादी की शान को

हम श्रद्धा से याद करेगें
गाँधी के बलिदान को |


लाल बहादुर शास्त्री हिंदी कविता


उड़ गए पंछी सो गए हम
अब हमको है लुटने का गम

क्या बतलाएं बापू तुमको दाने कहाँ गए।

जब उजले पंछी आए थे
तब हम उनसे टकराए थे
थे ताकतवर नरभक्षी थे
पर हमने मार भगाए थे

जान लड़ाने वाले वो दीवाने कहाँ गए।
क्या बतलाएँ बापू तुमको दाने कहाँ गए।

हैं गैरों से तो जीते हम
पर अपनों से ही हारे हम
कैसे-कैसे सपने देखे
जब नींद खुली आंखें थीं नम

बजुके पूछ रहे खेतों के दाने कहाँ गए।
क्या बतलाएँ बापू तुमको दाने कहाँ गए।

भुना रहे हैं एक रूपैय्या
जाने कैसे तीन अठन्नी
पैर पकड़कर हाथ मांगते
अब भी अपनी एक चवन्नी।

मुट्ठी वाले हाथ सभी ना जाने कहाँ गए।
क्या बतलाएँ बापू तुमको दाने कहाँ गए।

तुलसी के पौधे बोए थे
दोहे कबीर के गाए थे
सत्य अहिंसा के परचम
जग में हमने फहराए थे

नैतिकता के वो ऊँचे पैमाने कहाँ गए।
क्या बतलाएँ बापू तुमको दाने कहाँ गए।


Lal Bahadur Shastri Kavita in Marathi


2 ऑक्टोबर रोजी जन्म झाला,
नाव होते लाल बहादूर शास्त्री,
जरी तो उंचीने लहान होता,
परंतु गुण खूप चांगले होते,
साधा जीवन उच्च विचार,
ही त्याची ओळख होती,
गांधीवादी विचारसरणीची,
तो खरा अनुयायी होता,
स्वातंत्र्य लढा
ते सक्रिय योगी होते,
त्याच्या उत्कृष्ट कर्मामुळे,
तो भारताचा अभिमान होता,
त्यांचे देशप्रेम आणि समर्पण पण संपूर्ण देश अभिमान आहे,
वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा,
त्याचा खूप आदर आहे.


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