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महिला दिवस पर कविता – Short Poem On Women’s Day in Hindi

Short Poem On Women’s Day in Hindiहर साल 8 मार्च को समस्त विश्व महिला दिवस के रुप में मनाता है, पुरे विश्व में महिलाओं के योगदान एवं उपलब्धियों की तरफ लोगो का ध्यान क्रेंदित करने के लिए महिला दिवस के मनाया जाता है, इसको अंतरराष्ट्रीय शांति के लिये संयुक्त बुतपरस्त दिवस भी कहा जाता है, महिला दिवस का मतलब है वह दिन जो महिलाओं को सम्मान देने के लिए बना है, इसी को देखते हुए आज के इस लेख में हम आपको महिलाओं पर कविताएं एवं महिला दिवस पर कविता प्रस्तुत कराने जा रहे है, आशा करते है कविता संग्रह आपको अवश्य पसंद आएगा |

महिला दिवस पर कविताएं 

नारी तुम आस्था हो तुम प्यार, विश्वास हो,
टूटी हुयी उम्मीदों की एक मात्र आस हो,
अपने परिवार के हर जीवन का तू आधार हो,
इस बेमानी से भरी दुनिया में एक तुम ही एक मात्र प्यार हो,
चलो उठों इस दुनिया में अपने अस्तित्व को संभालो,
सिर्फ एक दिन ही नहीं,
बल्कि हर दिन नारी दिवस मना लो !

महिला दिवस पर कविता - Short Poem On Women's Day in Hindi

नारी दिवस पर कविता हिंदी में

दिलों में बस जाए वो मोहब्बत हूँ,
कभी बहिन, कभी ममता की मूरत हूँ।
मेरे आँचल में हैं से चाँद सितारे,
माँ के क़दमों में बसी एक जन्नत हूँ।
हर दर्द-ओ-ग़म को छुपा लिया सीने में,
लब पे ना आये कभी वो हसरत हूँ।
मेरे होने से ही है यह कायनात जवान,
ज़िन्दगी की बेहद हसीं हकीकत हूँ।
हर रूप रंग में ढल कर सवर जाऊं,
सब्र की मिसाल, हर रिश्ते की ताकत हूँ।
अपने हौसले से तक़दीर को बदल दूँ,
सुन ले ऐ दुनिया, हाँ मैं औरत हूँ !

Short Poem On Women Day in Hindi 

फूल जैसी कोमल नारी, कांटो जितनी कठोर नारी
अपनो की हिफासत मे सबसे अव्वल नारी
दुखो को दूर कर, खूशियो को समेठे नारी
फिर लोग क्यो कहते तेरा अत्सित्व क्या नारी
जब अपने छोटे छोटे व्खाइशो को जीने लगती  नारी
दुनिया दिखाती है उसे उसकी दायरे सारी
अपने धरम मे बन्धी नारी, अपने करम मे बन्धी नारी
अपनो की खूशी के लिये खुद के सपने करती कुुरबान नारी
जब भी सब्र का बाण टूटे तो सब पर भारी नारी
फूल जैसी कोमल नारी, कांटो जितनी कठोर नारी

Mahila Diwas Par Kavita 

महिला दिवस पर कविता - Short Poem On Women's Day in Hindi

ये औरत तुझे क्या कहुँ, तेरी हर बात निराली है
तू एक ऐसा पौधा है जिस घर रहे
वह हरियाली ही हरियाली है
तेरी शान में सिर्फ इतना कह सकते है की
तेरी उचाईयो के सामने आसमान भी नहीं रह सकता है
मेरी सिर्फ इतना सा एक पैगाम है
ऐ औरत तुझे मेरा सिर झुका कर सलाम है !

महिलाओं पर कविताएं

ये किसने कहा की,
नारी कमज़ोर है।
आज भी उसके हाथ में,
अपने घर को चलाने की डोर है।
वो तो दफ्तर भी जाए,
घर भी संभाले।
ऐसे हाल में भी कर दे,
पति अपने बच्चो को भी उसके हवाले।
एक बार उस नारी की ज़िंदगी जीके तो देख,
अपने मर्द होने के घमंड,
में तू बस यू बड़ी बड़ी ना फेक.।
अब हौसला बन तू उस नारी का,
जिसने ज़ुल्म सहके भी तेरा साथ दिया।
तेरी ज़िम्मेदारियों का बोझ भी,
ख़ुशी से तेरे संग बाट लिया।
चाहती तो वो भी कह देती,
मुझसे नहीं होता।
उसके ऐसे कहने पर,
फिर तू ही अपने बोझ के तले रोता !

मैं नारी हूँ कविता

तोड़ के हर पिंजरा
जाने कब मैं उड़ जाऊँगी
चाहे लाख बिछा लो बंदिशे
फिर भी दूर आसमान मैं अपनी जगह बनाऊंगी मैं
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ
भले ही परम्परावादी जंजीरों से बांधे है दुनिया के लोगों ने पैर मेरे
फिर भी उस जंजीरों को तोड़ जाऊँगी
मैं किसी से कम नहीं सारी दुनिया को दिखाऊंगी
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ !

Women’s Day Respect Poem in Hindi 

दुनिया की पहचान है,औरत
दुनिया पर एहसान है औरत
हर घर की जान है औरत
बेटी. माँ ,बहन,भाभी,बनकर
घर घर की शान है औरत
न समझो इसको तुम कमजोर कभी
ये है रिश्तो की डोर
मर्याद और सम्मान है औरत !

महिला दिवस पर छोटी कविता 

धन्य हो तुम माँ सीता,
तुमने नारी का मन जीता।
बढाया था तुमने पहला कदम,
जीवन भर मिला तुम्हें बस गम।
पर नई राह तो दिखला दी,
नारी को आज़ादी सिखला दी।
तोडा था तुमने इक बंधन,
और बदल दिया नारी जीवन।
तुमने ही नव-पथ दिखलाया,
नारी का परिचय करवाया।
तुमने ही दिया नारी को नाम,
हे माँ तुझे मेरा प्रणाम।

नारी सम्मान पर कविता

नारी सरस्वती का रूप हो तुम,
Naari लक्ष्मी का स्वरुप हो तुम,
बढ़ जाये जब अत्याचारी,
नारी दुर्गा-काली का रूप हो तुम.

नारी खुशियों का संसार हो तुम,
Naari प्रेम का सागर हो तुम,
जो घर आँगन को रोशन करती,
नारी सूरज की सुनहरी किरण हो तुम.

नारी ममता का सम्मान हो तुम,
Naari संस्कारों की जान हो तुम,
स्नेह, प्यार और त्याग की,
नारी इकलौती पहचान हो तुम.

नारी कभी कोमल फूल गुलाब हो तुम,
Naari कभी शक्ति के अवतार हो तुम,
तेरे रूप अनेक,
नारी ईश्वर का चमत्कार हो तुम.

Mahila Diwas Poem Hindi Students 

धन्य हो तुम माँ सीता,
तुमने नारी का मन जीता,
बढाया था तुमने पहला कदम,
जीवन भर मिला तुम्हें बस गम.

पर नई राह तो दिखला दी,
नारी को आज़ादी सिखला दी,
तोडा था तुमने इक बंधन,
और बदल दिया नारी जीवन.

तुमने ही नव-पथ दिखलाया,
नारी का परिचय करवाया,
तुमने ही दिया नारी को नाम,
हे माँ तुझे मेरा प्रणाम
मर्याद और सम्मान है औरत


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