गणतंत्र दिवस पर कविताएं 2020- Short Poem On Republic Day in Hindi- 26 जनवरी कविताएं

गणतंत्र दिवस पर कविताएं 2020- आज गणतंत्र दिवस है,  गणतंत्र को लोकतंत्र, जनतंत्र एवं प्रजातंत्र भी कहते है, भारत में रहने बाले सभी देशवासियों के लिए अधिक गर्व का दिन है,  क्योंकि इस दिन 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था और जब से हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। इसी शुभ अवसर पर आज की इस पोस्ट में आप सभी पाठकों के लिए Republic day poems in Hindi language & Hindi Font, 26 जनवरी कविताएं, Short Poem On Republic Day in Hindi,  में देख व pdf डाउनलोड कर सकते हैं| साथ ही class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चे इन्हे अपने स्कूल फंक्शन celebration व प्रोग्राम में सुना सकते हैं| गणतंत्र दिवस पर कविताएँ इन हिंदी  इस प्रकार हैं|



Short Poem On Republic Day in Hindi


माह जनवरी छब्बीस को हम सब गणतंत्र मनाते |
और तिरंगे को फहरा कर, गीत ख़ुशी के गाते ||
संविधान आजादी वाला, बच्चो ! इस दिन आया |
इसने दुनिया में भारत को, नव गणतंत्र बनाया ||
क्या करना है और नही क्या ? संविधान बतलाता |
भारत में रहने वालों का, इससे गहरा नाता ||
यह अधिकार हमें देता है, उन्नति करने वाला |
ऊँच-नीच का भेद न करता, पण्डित हो या लाला ||
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सब हैं भाई-भाई |
सबसे पहले संविधान ने, बात यही बतलाई ||
इसके बाद बतायी बातें, जन-जन के हित वाली |
पढ़ने में ये सब लगती हैं, बातें बड़ी निराली ||
लेकर शिक्षा कहीं, कभी भी, ऊँचे पद पा सकते |
और बढ़ा व्यापार नियम से, दुनिया में छा सकते ||
देश हमारा, रहें कहीं हम, काम सभी कर सकते |
पंचायत से एम.पी. तक का, हम चुनाव लड़ सकते ||
लेकर सत्ता संविधान से, शक्तिमान हो सकते |
और देश की इस धरती पर, जो चाहे कर सकते ||
लेकिन संविधान को पढ़कर, मानवता को जाने |
अधिकारों के साथ जुड़ें, कर्तव्यों को पहचानो ||

26 जनवरी के ऊपर कविता


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आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये; अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।
अपना 71वाँ गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेगे,
देश पर कुर्बान हुये शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।
26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,
भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंड़ा फहराया था,
मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था, थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी, था वो ऐतिहासिक पल हमारा,
जिससे गौरवान्वित था भारत सारा। विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है, पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है।
इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये, थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये, आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये, अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।|

गणतंत्र दिवस पर हास्य कविता


26 जनवरी को आता हमारा गणतंत्र दिवस,
जिसे मिलकर मनाते हैं हम सब हर वर्ष।
इस विशेष दिन भारत बना था प्रजातंत्र,
इसके पहले तक लोग ना थे पूर्ण रूप से स्वतंत्र।
इसके लिए किये लोगो ने अनगिनत संघर्ष,
गणतंत्र प्राप्ति से लोगों को मिला नया उत्कर्ष।
गणतंत्र द्वारा मिला लोगों को मतदान का अधिकार,
जिससे बनी देशभर में जनता की सरकार।
इसलिए दोस्तों तुम गणतंत्र का महत्व समझो,
चंद पैसो की खातिर अपना मतदान ना बेचो।
क्योंकि यदि ना रहेगा हमारा यह गणतंत्र,
तो हमारा भारत देश फिर से हो जायेगा परतंत्र।
तो आओ हम सब मिलकर ले प्रतिज्ञा,
मानेंगे संविधान की हर बात ना करेंगे इसकी अवज्ञा।

गणतंत्र दिवस पर कविता


पावन है गणतंत्र यह, करो खूब गुणगान।
भाषण-बरसाकर बनो, वक्ता चतुर सुजान॥
वक्ता चतुर सुजान, देश का गौरव गाओ।
श्रोताओं का मान करो नारे लगवाओ॥
इसी रीति से बनो सुनेता ‘रामसुहावन’।
कीर्ति-लाभ का समय सुहाना यह दिन पावन॥
भाई तुमको यदि लगा, जन सेवा का रोग।
प्रजातंत्र की ओट में, राजतंत्र को भोग॥
राजतंत्र को भोग, मजे से कूटनीति कर।
झण्डे-पण्डे देख, संभलकर राजनीति कर॥
लाभ जहां हो वहीं, करो परमार्थ भलाई।
चखो मलाई मस्त, देह के हित में भाई॥
कथनी-करनी भिन्नता, कूटनीति का अंग।
घोलो भाषण में चटक, देश-भक्ति का रंग॥
देश-भक्ति का रंग, उलीचो श्रोताओं पर।
स्वार्थ छिपाओ प्रबल, हृदय में संयम धरकर॥
अगले दिन से तुम्हें, वहीं फिर मन की करनी।
स्वार्थ-साधना सधे, भिन्न जब करनी-कथनी॥
बोलो भ्रष्टाचार का, होवे सत्यानाश।
भ्रष्टाचारी को मगर, सदा बिठाओ पास॥
सदा बिठाओ पास, आंच उस पर न आए।
करे ना कोई भूल, जांच उसकी करवाए॥
करे आपकी मदद, पोल उसकी मत खोलो।
है गणतंत्र महान, प्रेम से जय जय बोलो॥
कर लो भ्रष्टाचार का, सामाजिक सम्मान।
सुलभ कहां हैं आजकल, सदाचरण-ईमान॥
सदाचरण-ईमान मिले तो खोट उछालो।
बन जाओ विद्वान, बाल की खाल निकालो॥
रखो सोच में लोच, उगाही दौलत भर लो।
प्रजातंत्र को नोच, कामना पूरी कर लो॥

गणतंत्र दिवस पर बाल कविता


हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सब हैं भाई-भाई |
सबसे पहले संविधान ने,
बात यही बतलाई ||इसके बाद बतायी बातें,
जन-जन के हित वाली |
पढ़ने में ये सब लगती हैं,
बातें बड़ी निराली ||

लेकर शिक्षा कहीं, कभी भी,
ऊँचे पद पा सकते |
और बढ़ा व्यापार नियम से,
दुनिया में छा सकते ||


Republic Day Poem in Hindi For School Students


जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है|
जव प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है|
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है|
जव गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है|
जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है|
जव् नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है|
जव नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है|
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है||

गणतंत्र दिवस पर छोटी कविता


गणतंत्र दिवस पर कविता इस प्रकार हैं:-
मोह निंद्रा में सोने वालों, अब भी वक्त है जाग जाओ,
इससे पहले कि तुम्हारी यह नींद राष्ट्र को ले डूबे,
जाति-पाती में बंटकर देश का बन्टाधार करने वालों,
अपना हित चाहते हो, तो अब भी एक हो जाओ,
भाषा के नाम पर लड़ने वालों,
हिंदी को जग का सिरमौर बनाओ,
राष्ट्र हित में कुछ तो बलिदान करो तुम,
इससे पहले कि राष्ट्र फिर गुलाम बन जाए,
आधुनिकता केवल पहनावे से नहीं होती है,
ये बात अब भी समझ जाओ तुम,
फिर कभी कहीं कोई भूखा न सोए,
कोई ऐसी क्रांति ले आओ तुम,
भारत में हर कोई साक्षर हो,
देश को ऐसे पढ़ाओ तुम||

26 January Republic Day Poetry in Hindi



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है इतिहास इसका बहुत पुराना, संघर्षों का था वो जमाना,
न थी कुछ करने की आजादी, चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी,
एक तरफ विदेशी हमलों की मार,
दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात,
पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी,
विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी,
एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात,
छोड़ दी अपनी जान की परवाह, बस आजाद होने की थी आखिरी आस।

रिपब्लिक डे पोएम इन हिंदी


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हम गणतंत्र भारत के निवासी, करते अपनी मनमानी दुनिया की कोई फिक्र नहीं, संविधान है करता पहरेदारी !! है इतिहास इसका बहुत पुराना, संघर्षों का था वो जमाना; न थी कुछ करने की आजादी, चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी !! एक तरफ विदेशी हमलों की मार, दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात !! पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी, विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी !! एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात, छोड़ दी अपनी जान की परवाह, बस आजाद होने की थी आखिरी आस !! 1857 की क्रान्ति आजादी के संघर्ष की पहली कहानी थी, जो मेरठ, कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली और अवध में लगी चिंगारी थी !!

Republic Day Poem in Marathi Language


आमचा प्रजासत्ताक दिन 26 जानेवारी रोजी येतो
जो आपण दरवर्षी एकत्र साजरा करतो.
या विशेष दिवशी भारत लोकशाही होता
या वेळेपर्यंत लोक पूर्णपणे स्वतंत्र नव्हते.
लोकांनी यासाठी असंख्य संघर्ष केले आहेत,
प्रजासत्ताक मिळवून लोकांना नवीन कळस प्राप्त झाला.
प्रजासत्ताकाद्वारे लोकांना मत देण्याचा अधिकार मिळाला,
ज्यामुळे देशाचे सरकार स्थापन झाले.
म्हणूनच मित्रांनो, प्रजासत्ताकाचे महत्त्व समजून घ्या
पैशासाठी आपले मत विकू नका.
कारण जर आपले प्रजासत्ताक तेथे नसेल तर
तर आपल्या भारत देशाची पुनर्रचना होईल.
चला तर मग आपण सर्व मिळून तारण करू या
ते राज्यघटनेविषयीच्या सर्व गोष्टींचे उल्लंघन करणार नाहीत.

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